किसान के हक्क!
क्यो किसान का रात के दो बजे लाइट दी जाती हैं।
मैं गांव का रहने वाला किसान हूँ। किसान से शायद ही कोई हो जिसका पारिवारिक नाता न हो। किसान जो हमारी संस्कृति की जड़। जिस प्रकार बिना जड़ के कोई पेड़ खड़ा नही रह सकता। बिना जड़ो के कभी व्रक्ष विकसा नही कर सकता।
किसान ही वो कड़ी हैं। जो शायद आज सबसे दुखी हैं। जबकि सबसे महान कार्य कर रही हैं। किसान अगर एक वर्ष तक धान न उगाए तो समझो चारो तरफ अफरातफरी मच जाएगी। लेकिन आज अपने सुखों और हकको के लिए मोहताज।
कारण जितनी भी राजनीतिक पार्टियों से लेकर सभी सरकारी या गैर सरकारी विभाग,संस्थाए किसान का बैंड बजाने में लगी हैं। सबसे ज्यादा विकास की योजनाएं गांवो के लिए चलाई कारण किसान अनपढ़ हैं। 10% देंगे और 90% योजनाएं डकार जाएंगे। और वही हो रहा हैं।
लेकिन अब समय आ गया हैं। कि किसान को अपने हकको के लिए लड़ना पड़ेगा। जिसका खामियाजा किसान भूतकाल से भुगत रहा हैं।
आने वाले समय मे कई किसानों से जुड़े मुद्दे इस ब्लॉग पर जानने और पढ़ने के लिए मिलेंगे। अगर आपके पास भी किसान के हकको के लिए कोई मुद्दा हैं। जिसका किसानों को मिलना चाहिए तो जरूर भेजे आपका लेख शामिल किया जाएगा।
मैं गांव का रहने वाला किसान हूँ। किसान से शायद ही कोई हो जिसका पारिवारिक नाता न हो। किसान जो हमारी संस्कृति की जड़। जिस प्रकार बिना जड़ के कोई पेड़ खड़ा नही रह सकता। बिना जड़ो के कभी व्रक्ष विकसा नही कर सकता।
किसान ही वो कड़ी हैं। जो शायद आज सबसे दुखी हैं। जबकि सबसे महान कार्य कर रही हैं। किसान अगर एक वर्ष तक धान न उगाए तो समझो चारो तरफ अफरातफरी मच जाएगी। लेकिन आज अपने सुखों और हकको के लिए मोहताज।
कारण जितनी भी राजनीतिक पार्टियों से लेकर सभी सरकारी या गैर सरकारी विभाग,संस्थाए किसान का बैंड बजाने में लगी हैं। सबसे ज्यादा विकास की योजनाएं गांवो के लिए चलाई कारण किसान अनपढ़ हैं। 10% देंगे और 90% योजनाएं डकार जाएंगे। और वही हो रहा हैं।
लेकिन अब समय आ गया हैं। कि किसान को अपने हकको के लिए लड़ना पड़ेगा। जिसका खामियाजा किसान भूतकाल से भुगत रहा हैं।
आने वाले समय मे कई किसानों से जुड़े मुद्दे इस ब्लॉग पर जानने और पढ़ने के लिए मिलेंगे। अगर आपके पास भी किसान के हकको के लिए कोई मुद्दा हैं। जिसका किसानों को मिलना चाहिए तो जरूर भेजे आपका लेख शामिल किया जाएगा।
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